मसूरी। सीआरबी, दिल्ली एवं पी.एस.आई देहरादून के सहयोग से निर्णय लेने के लिए टीब एग्रीफूड फ्रेमवर्क माप और मूल्य की भूमिका विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए यूनाइटेड नेशन इनवायरमैंन्ट प्रोगाम के प्रतिनिधि डा. रूविन ने कहा कि अब समय आ गया है कि किसान संगठनों के व्यापार में कृषि और खाद्य के लिए पारिस्थितिकी तंत्र एवं जैव विविधता का अर्थशास्त्र टीईईबी पहल को समावेश करना होगा। इसके लिए किसानों के संगठनों एवं छोटे कृषि आधारित उद्यमियों द्वारा संचालित उद्यमों के चिरन्तरता की रणनीति को अपनाकर मजबूत आधार देना होगा।
उन्होनेें अपने सम्बोधन में आगे कहा कि इस पहल का उद्देश्य भारत में कृषि और खाद्य प्रणालियों में ट्रू वैल्यू अकाउंटिंग को बढ़ावा देना है, ताकि व्यवसाय अपने निर्णयों में प्राकृतिक, सामाजिक, मानवीय और उत्पादित पूंजी के प्रभावों को शामिल कर सकें। इससे पूर्व पी.एस.आई. के डायरेक्टर डा. देबाशीष ने कार्यक्रम के उददेश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एफपीओ के स्वालम्बन के लिए आर्थिकी के साथ साथ जैव विविधता के संरक्षण को बारीकी से समझकर कार्य करना होगा। प्रशिक्षण सत्र के दौरान हिम विकास स्वायत सहकारिता, टिहरी के प्रतिनिधि सौरभ रमोला ने कहा कि हमारी स्वायत सहकारिता प्राकृतिक, मानव संसाधन, सामाजिक एवं उत्पाद पूंजी का समावेश करने के लिए जागरूक एवं प्रयासरत है। उन्होंने जानकारी दी कि सहकारिता महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए खास प्रयास कर रही है। शिखर फुडस देहरादून के प्रमुख सत्य प्रकाश नौटियाल नें बताया कि बुरांश एवं माल्टा के विदोहल के लिए मानव संसाधन को दक्ष बनाकर वैज्ञानिक तौर तरीको का अपनाना होगा जिससे जैव विविधता एवं व्यापार को चिरन्तरता प्रदान की जा सके। प्रशिक्षण सत्र के दौरान उतरकाशी से आई रेड राइस लेडी के नाम से विख्यात स्वतन्त्री बंधानी ने बताया कि लाल चावल को बाजार में स्थापित करने के लिए गुणवता प्रबन्धन एवं बीज संरक्षण जैसे चुनौतियां से निबटना होगा जिसके लिए पर्वतीय कृषि उत्पादक स्वायत्त सहकारिता टीब एग्रीफूड फ्रेमवर्क को अपनाकर प्रयास कर रही है। इसी कडी में नैनीताल से आई हर्बल वाली नाम से जाने जानी वाली दीपा लोधियाल ने बताया कि औषधीय एवं सुगन्धित पौधों के उत्पादन के जरिए जैव विविधता एवं आथिकी को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उनकी स्वाभिमान स्वायत सहकारिता बीस से अधिक औषधियों पौधो पर आधारित उत्पादो को बाजार में उतार चुकी हैं जिनको देश एवं विदेश में विपणन किया जा रहा है। सीआरबी के सी.ई.ओ. डा. रिजित सेन ने प्रशिक्षण सत्र में व्यवसायों पर पडने वाले प्रभाव और निर्भरता की प्राथमिकता तय करने, संकेतकों और मापन विधियों को समझने, आधार रेखा निर्धारित करने तथा कार्य योजना बनाने पर गहन जानकारी प्रदान की। प्रशिक्षण में यूएनईपी दिल्ली की प्रतिनिधि रिया ने संगठनों में मानव संसाधन के बेहतर उपयोग की रणनीति पर गंभीरता से विचार करने का प्रयास करना होगा। इस दौरान संजीव साहू, दवनीत कौर एवं सिया चोपडा ने भी प्रशिक्षण सत्र संचालन में महत्वपूर्ण भागेदारी निभाई। पी.एस.आई की ओर से कुलदीप उनियाल, तासिफ, दिनेश शर्मा, दीपशिखा एवं पुष्पा जुयाल ने योगदान दिया। कार्यशाला में 30एफपीओ के 40 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
